शनिवार, 24 जनवरी 2026
पिता-3
एक सरकारी टेबुल होती है, जिसके दोनो तरफ खड़े लोग भी पिता ही होते हैं। इन टेबुलों पर उम्मीदों, मजबूरियों, बदहालियों की सजी फाइलों में सुविधाजनक धूर्ततापूर्ण टिप्पणियां दोनो तरफ खड़े पिताओं की जेब में एक अदृश्य सुरंग बनाती हैं।
टेबुल के इस पार खड़े पिता के चेहरे की चमक और उस पार खड़े पिता की झुर्रियांे ने असमय बूढ़े हो रहे इस युवा लोकतंत्र को अपनी अपनी सुविधाओं के अनुसार गढ़ा है।
टेबुल के इस पार का पिता टेबुल के उस पार खड़े पिता की जेब के रास्ते से सरकारी पार्टियों के प्रतिनिधियों, ठेकेदारों, दबंगों, तथाकथित समाजसेवियों की जेब तक का एक बाईपास रचता है।
इन्ही बाइपासों के उद्घाटन समारोहों में उम्मीदों का लवंडा डांस होता है, लवंडा डांस एक कुंठित पुरुष प्रधान समाज के मनोरंजन के लिए स्त्रैण गुणों के विकृत प्रस्तुतिकरण को कहते है। लवंडा डांस के बाद टेबुल के उस पार के पिता के घर लौटने पर उसकी बहकी बहकी बातें घरवालों को अचरज में डालती हैं लेकिन उनकी फटी जेब देखकर सभी आश्वस्त हो जाते हैं कि दुनिया अभी यथावत है। टेबुल के इस पार का पिता इस लवंडा डांस की सफलता में अपने तनख्वाह, प्रमोशन, पोस्टिंग और इंक्रीमेण्ट की आश्वस्ति जेब में भर कर लौटता है।
अपने युग के ये संज्ञाविहीन पिता आप्त वाक्यों की भूलभुलैया में मंजिलों के लिए राजमार्गो की तलाश में पगडंडियों पर भटकते राही हैं।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
जेन जी के द्वन्द
सुबह उठकर चाय बनाने के लिए फ्रिज से दूध निकालते समय देखा कि दूध पर मलाई की एक मोटी परत जमी है, जिसको निकालकर अलग एक बरतन में रखा जिसमें लगात...
-
डाक्टर की फुसफुसाहट कमरे से बाहर तैर गयी, च ौथी स्टेज है यह सुनते ही, दुनिया पराई नजर आयी। कर्ज कितना रह गया है, बेटे की पढ़ाई का, बेटी क...
-
सुबह उठकर चाय बनाने के लिए फ्रिज से दूध निकालते समय देखा कि दूध पर मलाई की एक मोटी परत जमी है, जिसको निकालकर अलग एक बरतन में रखा जिसमें लगात...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें