मंगलवार, 6 नवंबर 2012

नरेगा


अलसाई और उदास सुबह में, 
एक आवाज गूंजती है,
बस्ती में शुरू हो जाती है हलचल |
इधर उधर लुढके बासी बर्तन,
जल्दी-जल्दी चमकने लगते है |
चूल्हा,मुर्गी,बकरी, बुजुर्ग,
किशोरों की जिम्मेदारी बन जाते है |
बलगम थूकते,सुरती ठोकते एक चेहरा,
सम्मिलित स्वर में चहकता है,
आज शुरू होगा काम "नरेगा" का |
......................................
चिलचिलाती धूप में,
चीटियों की मानिन्द,
चली जा रही है फावड़ो की पातें|
पसीने की धार में डूबे,
ठहाके गूंज रहे है |
दूर मेंड़ पर बैठा किसान,
श्रम की ब्यर्थता पर,
गालिया बक रहा है,
काम चल रहा है "नरेगा" का |
................................
वातानुकूलित माहौल से उबकर,
अपनी अहमियत के लिए बेचैन,
ब्रांडेड ब्यक्तित्व,
पसीने में तमतमाए चेहरों से,
पूछ रहा है हिसाब "नरेगा" का,
सूंघ रहा है,
अपनी संतुष्टि का श्रोत |


13-07-2012

(नरेगा-- भारत सरकार द्वारा ग्रामीण मजदूरों को काम दिलाने वाली योजना है )

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