खुद से
सहमते कदमो से बहुत दिनों बाद लिखना सीखने की शुरुआत कर रहा हु । विद्वानों का कहना है की कालजई लेखकों और विश्वप्रसिद्ध रचनाओं को पढने के बाद खुद के लिखने की कसौटी बहुत कड़ी हो जाती है । अपनी कसौटी पर उतरना भी अपने आत्मविश्वास की परीक्षा होती है ।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें