शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

खुद से


सहमते कदमो से बहुत दिनों बाद लिखना सीखने की शुरुआत कर रहा हु । विद्वानों का कहना है की कालजई लेखकों और  विश्वप्रसिद्ध  रचनाओं को पढने के बाद खुद के लिखने की कसौटी बहुत कड़ी हो जाती है । अपनी कसौटी पर उतरना भी अपने आत्मविश्वास की परीक्षा  होती है । 

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