- घड़ी -
जनरेटर शांत होते ही,
फैले अँधेरे में,
पत्तलों पर जूझते कुत्तो की गुर्राहट,
सन्नाटे को भंग कर रही है।
प्रयोजन के गुणदोष पर,
फुसफुसाते हुए मेहमानों,
के होठो पर तैर रहा है,
तुम्हारे वजूद से बना रिश्ता ।
तमाम थकन के बावजूद,
नीद से कोसों दूर आखो में,
याद आ रहा है,
तुम्हारा प्रथम आगमन,
जिसका अवशेष साक्षी मै,
बंसखट पर बलगम थूक रहा हूं।
गोबर लिपे आंगन में,
तुलसी के चौरे पर,
बुदबुदाती माँ,
तुम्हारी प्रथम सन्तति के,
सकुशल होने की प्रार्थना कर रही है।
बेटी की बिदाई पर,
धार-धार रोती आंखे,
और बेटों के बंटवारे पर,
हतप्रभ चेहरे से,
अपनी उम्र के पड़ाव,
गिनता रहा हूं,
शायद अब वो घड़ी,
भी बंद हो गई,
जो बुढ़ाते समय का सन्देश देती।
14-10-2012
याद आ रहा है,
तुम्हारा प्रथम आगमन,
जिसका अवशेष साक्षी मै,
बंसखट पर बलगम थूक रहा हूं।
गोबर लिपे आंगन में,
तुलसी के चौरे पर,
बुदबुदाती माँ,
तुम्हारी प्रथम सन्तति के,
सकुशल होने की प्रार्थना कर रही है।
बेटी की बिदाई पर,
धार-धार रोती आंखे,
और बेटों के बंटवारे पर,
हतप्रभ चेहरे से,
अपनी उम्र के पड़ाव,
गिनता रहा हूं,
शायद अब वो घड़ी,
भी बंद हो गई,
जो बुढ़ाते समय का सन्देश देती।
14-10-2012

यथार्थ का बोध कराती आपकी पोस्ट प्रशंसनीय है .आभार
जवाब देंहटाएंहम हिंदी चिट्ठाकार हैं
बढिया
जवाब देंहटाएंबहुत बेहतरीन
जवाब देंहटाएं