मंगलवार, 27 नवंबर 2012

-सभ्यता-


भौकते हार्नो और ,
चीखते ब्रेको के बीच ,
महानगर में,
सहमा सा चल रहा हू |
जैसे आदमखोरों के ,
जंगल में ,
निरस्त्र टहल रहा हूं |
सभ्यता शायद ,
धरती के साथ ,
वृत्ताकार परिपथ में ,
चल रही है |
और घूमते हुए फिर उसी ,
आदिम युग में टहल रही है |


15-09-2012

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

सुपर स्टार को श्रद्धांजली



याद आ रहे है वे दिन ,
जब निराशा और क्रूरता से भरी दुपहरो में ,
माहौल से मुटभेड लेते ,
अँधेरे हाल में ,
हमसब अकेले होते थे |
नायको , प्रतिनायको, खलनायको ,
और उनके स्त्रिरुपो के साथ ,
गुस्सा ,सिसकियाँ और आह भरा करते थे |
ठगों , लुटेरो और जालसाजो ,
की पूंजी से रची गई ,
उस मायावी दुनिया के बाहर आते ही ,
पेसाबखाने की दुर्गन्ध और चिलचिलाती धूप,
हमे फिर उन्ही ठगों ,लुटेरो और जालसाजो ,
की पूंजी से रची गई ,
वास्तविक दुनिया में लाती थी |
सुपरस्टार ...................,
तुम्हारी मौत पर ,
हम वाकई दुखी ,
होना चाहते थे |
लेकिन तमाशे के बीच में ,
विज्ञापनों में घूमती ,
नंगी लडकियों की ,
चुहलबाजियाँ ,
माहौल को संजीदा ,
नही होने दे रहीं थीं |


20-07-2012


गाड पार्टिकिल



खाए अघाए भक्तो को ,
दुःख में डूबे चेहरों को ,
आश्वस्त कर रहा है गुरु |
आखिर वैज्ञानिक भी ,
अथक परिश्रम के बाद ,
अरबो डालर खर्च करने के बाद ,
वही पहुचे ,
जहाँ हमारे मनीषी ,
सदियों पहले से धुनी रमाये थे |
(फर्क इतना है कि ,
हमने कमाए हैं ,
उन्होंने गवाएं हैं .)
ओह " गाड "
तुम्हारे" पार्टिकिल" ने ,
कितना अँधेरा फैला रखा है |





20-07-2012

नरेगा


अलसाई और उदास सुबह में, 
एक आवाज गूंजती है,
बस्ती में शुरू हो जाती है हलचल |
इधर उधर लुढके बासी बर्तन,
जल्दी-जल्दी चमकने लगते है |
चूल्हा,मुर्गी,बकरी, बुजुर्ग,
किशोरों की जिम्मेदारी बन जाते है |
बलगम थूकते,सुरती ठोकते एक चेहरा,
सम्मिलित स्वर में चहकता है,
आज शुरू होगा काम "नरेगा" का |
......................................
चिलचिलाती धूप में,
चीटियों की मानिन्द,
चली जा रही है फावड़ो की पातें|
पसीने की धार में डूबे,
ठहाके गूंज रहे है |
दूर मेंड़ पर बैठा किसान,
श्रम की ब्यर्थता पर,
गालिया बक रहा है,
काम चल रहा है "नरेगा" का |
................................
वातानुकूलित माहौल से उबकर,
अपनी अहमियत के लिए बेचैन,
ब्रांडेड ब्यक्तित्व,
पसीने में तमतमाए चेहरों से,
पूछ रहा है हिसाब "नरेगा" का,
सूंघ रहा है,
अपनी संतुष्टि का श्रोत |


13-07-2012

(नरेगा-- भारत सरकार द्वारा ग्रामीण मजदूरों को काम दिलाने वाली योजना है )

शनिवार, 3 नवंबर 2012

विकल्प के प्रयास


     
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शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

स्मृतियाँ


दादा की लाई पहली लालटेन,
पिता का बत्तियो वाला स्टोव, 
और चाचा की पहली तनखाह का कुकर,
घर के एक गुमनाम से कोने में,
अपनी अपनी स्मृतियों की चादर में लिपटे पड़े थे |
मेरे घर की जवान हो रही पीढ़ी को शायद,
लालटेन की उस पहली उजास का पता नही था,
जिसके आंगन में फैलते ही दिबरिया जलभुन गई थी|
उस पीली उजास की मद्धिम रोशनी में,
कई नव परींनिताओ के रतजगे हुए होगे |
उसी की मद्धिम रोशनी को निहारते हुए,
कितनी दर्द में डूबी रातें कटी होगीं |
कितनी ख़ुशी मिली होगी,
जब तीज त्योहारों पर ब्यंजनो को बनाने में,
पनियाई आखों को धुएं से मुक्ति मिली होगी |
कुकर ने तो शायद अपनी पहली सिटी से ही,
भारी भरकम बर्तनों को,
रसोईं से बाहर कर दिया होगा |
मेरे घर की जवान हो रही पीढ़ी को शायद,
घर के उस कोने में बची स्मृतियों में,
अपने स्पेश की तलाश ख़त्म हो रही है |
किसी कबाड़ी की तराजू में,
इन स्मृतियों का वजन हो रहा है |
28-04-2012

आखिर- क्यों

----आखिर- क्यों-----
आखिर- क्यों सामाजिक उद्वेलन की उत्ताल लहरें,
टी वी विज्ञापनों के बीच,
समय को भरने वाला मसाला बन जाती है |
आखिर- क्यों गरीबी की रेखा,
सिनेमा की रेखा की तरह,
६० साल बाद भी सदाबहार दिखती है|
आखिर- क्यों पिछडो के नेता,
हरित क्रांति के उत्तर जीवियो की,
लिप्सा के प्रतिनिधि बन जाते है |
आखिर- क्यों दलितों की उम्मीद,
उनके कंधे पर सवार होकर,
नौकरशाहो का सर्कसी शेर बन जाती है |
आखिर- क्यों दुनिया को बदलने का जज्बा पाले लोग,
या तो किताबो के बीच सड़ते है,
या किसी संथाल के कंधे पर टंगे बैताल बन जाते है |
आखिर- क्यों सदियों तक लड़ने के बाद भी,
विज्ञानं धर्म की तरह,
समर्थो की सेवा में लग जाता है |
आखिर- क्यों वर्तमान में किसी क्यों का जवाब नही होता ,
शाएद हर क्यों वर्तमान के भूत होने का इंतजार करता है |


28-03-2012

खुद से


सहमते कदमो से बहुत दिनों बाद लिखना सीखने की शुरुआत कर रहा हु । विद्वानों का कहना है की कालजई लेखकों और  विश्वप्रसिद्ध  रचनाओं को पढने के बाद खुद के लिखने की कसौटी बहुत कड़ी हो जाती है । अपनी कसौटी पर उतरना भी अपने आत्मविश्वास की परीक्षा  होती है । 

जेन जी के द्वन्द

सुबह उठकर चाय बनाने के लिए फ्रिज से दूध निकालते समय देखा कि दूध पर मलाई की एक मोटी परत जमी है, जिसको निकालकर अलग एक बरतन में रखा जिसमें लगात...