१२ नवम्बर की शाम को प्रोफ़ेसर लालबहादुर वर्मा से  आदमी के बायोलॉजिकल मैन से कल्चरल मैन के रूप में विकसित होने की अवधारणा को सुना । आज सुबह  सोच रहा था कि कल्चरल मैन सम्भवतः  प्रकृत का बाई प्रोडक्ट है और ये बाई प्रोडक्ट इस स्थिित में आ रहा है की प्रकृत को अपना प्रोडक्ट बना ले । यह मनुष्य के लिए समग्रता में शुभ   होगा या अशुभ  होगा यह तो  भविष्य बतायेगा लेकिन  शुभ  की  कामना ।  

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