क्रिकेट का तिलस्म और वान्डर्रस का मैदान-2
संयोग से जहां हमलोग रह रहे थे उस कालोनी से पांच मिनट की पैदल दूरी पर ही वांडर्रस था। वान्र्डरस अकेला मैदान नही है यह कई छोटे-बड़े मैदानों का बिग बाजार है जिसके अगल-बगल तमाम छोटे-बड़े मैदान हैं, फुटबाल के, रग्बी के । प्रायः शाम को ये मैदान खेलने वालों से भरे मिलेगें। फुटबाल के छोटे-छोटे मैदान भी हैं जिसमे 6-6 खिलाड़ी भी खेल सकते हैं। ये मैदान रात मे दूधिया रोशनी से जगमगाते मिलेगें चाहे ठण्ड पड़ रही हो या बारिश हो रही हो, तेज संगीत और दूधिया रोशनी मे खेल अपनी पूरी रवानी पर मिलेगा। मैदान तारों के बाड़े से घिरे हुए होते हैं जिससे गेंद बाहर न जा सके और मैदान के बगल से सनसनाती गुजर रही कारों को किसी तरह की दिक्कत न हो। फिटनेस और खेल के प्रति यह मुल्क दीवाना है न कि हमारे समाज की तरह जिसमे खेल एक खास उम्र की बेचैनी भर है।
उस दिन श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका का मैच था। वान्डरर्स की तरफ आने वाली सड़के दोपहर 1 बजे से गुलाबी टी शर्ट पहने युवाओं, स्त्रियांे, बुर्जुगों से भरी हुई थी वान्डरर्स मे होने वाले अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच मे ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रहे लोगों के प्रति एक जुटता दर्शाने के लिए महिलाएं, पुरुष गुलाबी वस्त्र पहन कर मैदान मे आते हैं और दक्षिण अफ्रीकी टीम भी इसी रंग के वस्त्र पहन कर मैदान मे उतरती है। गुलाबी वस्त्र पहनने की अनिवार्यता नही होती लेकिन मैदान तीन चैथाई गुलाबी वस्त्रों के कारण गुलाबी रंग मे रंगा होता है। मैदान की तरफ आने वाली सड़को पर मीलों आगे से अश्वेत युवा कार मालिकों को कार पार्किंग मे खड़ा करने का इशारा करने लगते हैं। पार्किगं मतलब सड़कों पर कार खड़ा करने के लिए बनाई गयी पार्किंग और इशारा करने वाले प्राइवेट लोग होते हैं जो आपकी कार पार्क कराकर उसकी देखभाल करगें और बदले मे दो-चार रैण्ड जैसी आपकी खुशी हो आपसे लेगें । इन मैंचांे मे यहां के कुछ निवासी कार पार्क करने वालों से दुखी हो कर अपने मकान के बाहर की सड़क पर कार पार्क न करने की तख्ती भी टांग देते है और लोग उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए वहां पर कार पार्क नही करते हैं ।
मेले मे जाते लोगों का उत्साह देखते-सुनते और कुछ गलतफहमियों के कारण थोड़ा सा विलम्ब हो गया लेकिन मैदान मे घुसते ही एक अलग दुनिया थी। उर्जा से ओतप्रोत एक जन समूह हिलोरे ले रहा था, खूबसूरत मैदान मे एक-एक शाट पर बजने वाला संगीत, दर्शकों की लयबद्ध तालियां या क्रमशः खड़े होकर दर्शक दीर्घा मे समुद्र की लहर उठने का दृश्य पैदा करना क्रिकेट से कहीं उपर था। दर्शक दीर्घा करीब चालीस प्रतिशत गोरों से भरी थी शेष अश्वेत और भारतीय समुदाय था। अफ्रीकी टीम के नए गेंदबाज रवाडा के प्रति दर्शकों का समर्थन देखने लायक था लेकिन अच्छे क्रिकेट की सराहना राष्ट्र की सीमाओं से परे जाकर हो रही थी। वान्डरर्स मे उस दिन 30 प्रतिशत क्रिकेट, 30 प्रतिशत बीयर, 30 प्रतिशत दर्शकों का खेल था और शेष बयान के बाहर था। सबसे अधिक आश्चर्य जनक लगा कि लंच के समय पिच को घेर कर मैदान को दर्शकों के लिए खोल दिया गया और आधे से अधिक दर्शक मैदान मे उतर कर चहलकदमी करने लगे। खेल शुरु होने के दस मिनट पहले मात्र दो-तीन लोगों द्वारा जगह-जगह खड़े होकर इशारा किया गया और पूरा मैदान खाली हो गया। कितना विश्वास है अपने दर्शकों पर इस मैदान के प्रबन्धकों का शायद खेल भावना से भरे हुए समाजो मे यह आत्म विश्वास आ जाता है कि वे एक-दूसरे पर विश्वास कर सकें । वाडरर्स से बाहर निकलते-निकलते मुझे समझ मे आया कि यह भीड़ क्रिकेट देखने नही बल्कि खेल को जीने जाती है। उस दिन मधुमक्खियों ने भी लगभग एक घण्टा मैदान पर कब्जा कर लिया था मधुमक्खी भगाने वालों का दर्शक उसी उत्साह से तालियां बजा कर उत्साह वर्धन कर रहे थे जैसे उन्होने कोई शानदार कैच लपका हो।



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