पत्थर के गिट्कों से उछलती बाइकों पर बिना फलोर के डिस्को करते मजनुओं, किसी भी जाम की टांग में अपना अगला पहिया डाल कर गुर्राते टेम्पुओं, डाक्टरों की सट्टी में मरीज फंसाते कुंजड़ों , अकबकाये सैलानियों को हर क़ुब्यवस्था का सोंदर्य दिखाते गाइडों, ठगों को भी ठगते महान ज्योतिषियों के साथ शंकर की बरात के अन्य समस्त विभुतिओं की काशी में लोग सदियों से अपना पाप धोने आते रहें है। इ सही है की ए बार इलेक्सन की होली में खूब कबीर गाये जायेंगे, लेकिन बनारसियों से अनुरोध है की कबीर पर अपना जन्मसिद्ध अधिकार होने के बावजूद इस होली में उनके अश्लील संस्करण से बचियेगा नहीं तो बहरियो समझ जायेंगे कि बनरसिया खाली हवा बाँधते हैं। हवा पर याद आया चचा कह रहे थे कि नेतवा सब हवा पर भी अपना अधिकार मान लिए है, मीडिया वाले हांक रहे हैं इ बार फलाने की हवा है, अरे कैसा जमाना आ गया बदबू को भी हवा समझते हैं। अब बदबू साफ नही कर सकते तो नाक दबा कर निकल जाइये जइसे, अंग्रेजवा सब मनकनीका घाट से निकलते हैं, लेकिन जिनका कफ़न बेंचने का रोजगार है उ तो रहबे करेंगें न अउर जिनको दाह संस्कार करना है उनकी भी मजबूरिये है भाई.……… चचा समझा रहे थे। .………………… होली की अग्रिम शुभकामना मित्रों।
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