श्री नारायण भाई देसाई ने गांधी जी के जीवन ,आदर्शो  और दर्शन को रोचक शैली में समझाने के लिए कथा शैली का प्रयोग किया है। वो गांधीजी के वैयक्तिक सहायक स्व ० महादेव देसाई के पुत्र है तथा उनके जीवन का प्रथम २२ वर्ष गांधीजी के सानिध्य में गुजरा है। उनके तथा गांधीजी की उम्र में करीब ५८ वर्षों का फासला था लेकिन गांधी उनके साथ समवयस्क हो जाते हैं। नारायण भाई देसाई की गांधी कथा समस्त श्रोताओं को बालक मोहन से बैरिस्टर गांधी और बैरिस्टर गांधी से महात्मा गांधी बनने का श्रोता नही बनाती अपितु इतिहास के उस खंड का सहयात्री भी बनाती है। कथावाचक बारबार श्रोताओं को गांधी को महात्मा के बजाय मनुष्य समझने का आग्रह करता है और धीरे धीरे श्रोता की समझ को इस प्रकार विकसित करता है की वो एक साधारण मनुष्य की क्षमता को समझ सके।  ऐसी कथा शैली को और विस्तार दिए जाने की अवश्यकता है।

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