बुधवार, 1 मई 2013

- गिद्ध-


अर्द्ध निर्मित पलस्तर विहीन,
मकान के सामने,
लाल,नीली,पीली बत्तियो वाले,
कैमरा चमकाते गिद्धों को,
देखते ही,
टोला जुट जाता है ।
घर के भीतर से,
निकलती घुटी-घुटी चीख,
खेलते हुए,
धूल-धूसरित बच्चों को,
स्तब्ध कर देती है।
छिलंगी दार खटिया में पड़ा,
कथरी में लिपटा झुर्रीदार चेहरा,
चश्मा पोछतें हुए  नवागन्तुको  को,
पहचानने  की कोशिश करता है,
फिर सिरहाने से,
भूमि नीलामी की पर्ची दिखाकर,
बिलखने लगता है ।
गिद्ध ........पर्ची लेकर,
भीड़ में इस हादसे की ,
अगली संभावना निहारते है ।
जब वो फिर पंख फड फड़ाते हुए,
इस  महाश्मसान के,
आसमान में चक्कर लगायेंगे,
आपस में खूब चीखेंगे-चिल्लाएंगे ।
कल की संभावना से पुलकित,
बहुत उदास दिख रहें है, गिद्ध ।


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