कैप्टेन लक्ष्मी सहगल


वर्मा के जंगलो में,
मलेरिया बुखार से,
सफेद हो गये,
पपडीदार  होठों,
और,
बारुद से पथराये सपनों ने,
जिन्दगी भर,
युद्धरत रहने का संकल्प दिया होगा ।
लेकिन ..................
इस बिकाऊ वक्त में ,
जब भडुए और ढिढोरची ही,
नायकत्व के प्रतिमान हों।
तुम्हारे लिए नया,
विशेसण  गढ़ने में ,
लगने वाले वक्त तक,
स्थगित रहें ...................
विसर्जन समारोह,
लम्बित रहें ..........
श्रधान्जली सभाये ।
(कैप्टेन लक्ष्मी सहगल  के निधन पर उनकी स्मृति में ) 

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट