गांव का हाल-1(नवरंग में प्रकाशित)


हलो.........हलो..........
  मोबाइल लेकर रामरती कोठरी से आंगन तक और अगवार से पिछवार तक दौड़ लगा रही थी लेकिन टावर गायब हो गया ।
उसे गुस्सा आया पता नही मोबाइल पर या अपने पति पर और......निबहुरा......कहकर मोबाइल ताक पर रखा ही था कि फिर उसमे भोजपुरी कालर ट्यून बजने लगा । हलो...........हलो......हां............हां............सुनायी देतबा............इहां सब ठीक बा............हलो....................हलो.................हां.......हां...........इहां सब ठीक बा...........धत तेरी कि......फिर टावर गायब हो गया ।
उसकन लेकर बरतन रगड़ते हुए उसका गुस्सा लगातार चढ़ रहा था, आज इनका फोन आएगा तो कहूंगी चाहे जो हो जाय, पैसा भेजो पखाना बनवाना है।
ई मोबाइल से पूरी बात नही हो पाती है आज चिठ्ठी लिखूंगी, आखिर नैहर के स्कूल का पढ़ना लिखना किस काम आएगा ।
रामरती को जितना गुस्सा आ रहा था बरतन उतने ही चमक रहे थे ।
गुस्सा इस बात पर भी आ रहा था कि कई दिन पर आज आधी रात मे बिजली आयी थी और भोर मे उठकर मोबाइल चार्ज मे लगाया था लेकिन बात नही हो पायी ।
लड़का अभी उठेगा तो कितनो मना करो मोबाइल से गेम खेलना शुरु कर देगा और फिर बैटरी खतम हो जाएगी ।
उसका आदमी भी फैक्टरी पर निकलने के पहले सबेरे एक बार कोशिश करता है आज फोन लगा भी तो बात नही हो पायी ।
जबतक पूरा अजोर हो बरतन माज कर उसने कागज कलम उठा लिया.............सम्बोधन मे कुछ लिखने से लजाते हुए स्याही ने शिकायतो को शिनाख्त करना शुरु कर दिया ।
लड़का एकदम नही पढ़ता है...जब से मोबाइल पाया है उसीसे खेलने लगता है जिससे बैटरी बार बार डिस्चार्ज हो जाती है।
बिजली कई दिन पर रात बिरात कब आती है पता ही नही चलता, वही उठकर मोबाइल चार्ज मे लगाता है।
अब जिद कर रहा है कि उसको भी एक मोबाइल चाहिए, कहां से खरीद......ब हमहूं के पता है ओसे कौनो बहाना कर दी...ह।
आजकल सबेरे-सबेरे निपटान के समय टोका-टाकी करते हैं एकदिन परधान कह रहे थे शौचालय बनवा ल, 4000रु0 दे रहे थे बतावा चांपाकल लगाने के लिए एतना दिन से कह रहे है कि हमलोगों के आठ-दस घर के बीच मे चांपाकल नही है तो इसपर चुप्प हो जाते हैं आखिर पखाना बनवाएगे तो पानी कहां से लाएगें ।
अबही तो पानी खातिर वैसे ही मारामारी रहता है बछियवा को भी दिन भर मे तीन-चार बाल्टी पानी लग जाता है, बरतन-बासन, नहान-धोअन, खाना-पीना, चूल्हा-चैका खातिर ओतना दूर से पानी ढोते ढोते सांस फूलता रहता है इसी मे पखाना खातिर भी पानी ढोने का काम बढ़ जाएगा।
लेकिन पखाना भी जरुरी हो गया है क्योंकि जबसे पूरुब वाला बगीचा कटकर वहां पर भट्ठा खुल गया है कहीं एकान्त नही रह गया है।
ई सोबरना जब से परधान के गोल मे हो गया है तबसे बड़ा खरखाह बन गया है, सबेरे-सबेरे चक्कर लगाने लगता है परधनवा उसकी माई का विधवा पिन्सिन पास करा दिया है ।
कइसहूं कुछ पैसा का जोगाड़ करो तो परधान वाला पैसा लेकर पिछवारे पखाना बनवा दें । इससे दो काम हो जाएगा एक तो पखाना बन जाएगा और पिछवारे वाली जगह मे बड़की माई बकरी बांध रही है उस पर उनकी नियत डोल रही है, जिससे वहां पर कुछ बनवाना जरुरी हो गया है।
अरे...................हां सुधना बड़की माई मर गइलीं, उनके तेरही के बाद दुनो पतोहों मे खूब झगड़ा हुआ ।
सुधना बड़की माई के बड़का बेटा के पास आजकल आमदनी है उ धूमधाम से तेरही करना चाहता था लेकिन छोटका का हाथ तंग था उ सोच रहा था जैइसे बाऊ का हुआ था वैसे ही हो जाय और उसने बड़के भाई के हिसाब से तेरही करने मे आधा खर्चा देने से इन्कार कर दिया था तेरही तो ठीक-ठाक से हो गयी लेकिन बड़की माई के कमरा पर बड़की पतोह जब कब्जा करने लगी तो दोनो मे खूब झगड़ा हुआ ।
कैसा जमाना आ गया है..........रामरती सोचने लगी ।

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