शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

30 जनवरी को "सरकारी गाँधी" की हत्या पर 2 मिनट का मौन रखने के बाद "आंदोलनकारी गाँधी" की शहादत पर आयोजित गोष्ठी में भाग लेने चला गया । विषय उसी सम्प्रदायकिता का था जिसने विभाजन में लाखों लोगों के खून से अपना कटोरा नही भर पाने के कारण गांधी की भी आहुति ली थी । शहर के विभिन्न लोगों को सुनकर,  सवाल की गम्भीरता पर चिंतामग्न घर लौटा । शाम को घर खाली था और मैं रिमोट का मालिक बन गया । एक चैनल पर फ़िल्म आ रही थी "नो -मेंस लैंड "। बोस्निया युद्ध पर ये बहुत अच्छी फ़िल्म है । फ़िल्म में एक सैनिक युद्धरत सेनाओं की मोर्चाबंदी  के बीच बारूदी सुरंग पर इस तरह फंस जाता है कि वो करवट भी ले तो बारूद उसके चीथड़े उड़ा सकती है । न्यूज़ चैनलों के दबाव में संयुक्त रास्ट्र संघ के टेक्नीशियन सुरंग पर से उस सैनिक को हटाने की कोशिस करते हैं लेकिन उनको जल्दी ही पता चल जाता है कि बारूदी सुरंग को हटाया जाना सम्भव नहीं है । एक उदास संगीत और ढलती शाम की पृष्ठभूमि में कैमरा उस विवश  सैनिक से  धीरे धीरे दूर होता चला जाता है । 
पता नहीं क्यों मुझे पूरा भारतीय उप महाद्वीप बारूदी सुरंग पर फंसे उस विवश सैनिक की तरह लगा । बगल में बैठे मित्र से बोला यार मानता हू ईश्वर बहुतेरे मनुष्यों की अवश्यकता है, लेकिन क्या वो धर्म से अपना पीछा छुड़ा नही सकता । मित्र ने हमेशा की तरह मेरी बुद्धि पर तरस खाकर ठहाका लगाया और बोला भाई धर्म तो उसी मेकेनिज्म का बाई प्रोडक्ट है जिससे ईश्वर बनता है । मैंने फिर संभावना प्रगट की कि अब तो बहुत सी कम्पनियां अपने हानिकारक बाई प्रोडक्ट से बचने की तकनीक विकसित कर रही हैं फिर सामाजिक क्षेत्र में ऐसी सम्भावना क्यों नहीं है । उसको मेरे प्रश्न में कुछ दम तो लगा लेकिन फिर मेरी सम्भावना को ख़ारिज करते हुए बोला, इसमें कोई तात्कालिक फायेदा तो है नही फिर कोई इसमें क्यों इन्वेस्ट करेगा । 
उदास मन से चैनल बदलने लगा तो खबर आ रही थी कि 84 ,गुजरात , मुरादाबाद के प्रेत अपनी अपनी कब्रों से निकलकर अपने अपने वार लार्डो की सेवा में पहुँच चुके हैं । मैं पूरी रात बिस्तर पर करवट नहीं बदल रहा था कि कही कोई बारूदी सुरंग न फट पड़े । पता नही ये डर सपना है या हकीकत, इसका जवाब तो सुबह ही दे सकती है । 

जेन जी के द्वन्द

सुबह उठकर चाय बनाने के लिए फ्रिज से दूध निकालते समय देखा कि दूध पर मलाई की एक मोटी परत जमी है, जिसको निकालकर अलग एक बरतन में रखा जिसमें लगात...