ड्राईंग रूम बहुत उदास था,
इसलिए नही कि ,
श्रीलंकाई तमिलों की क्षत -विक्षत लाशों ने,
क्रूरता कि पराकास्ठा दिखलाई थी।
इसलिए नही कि,
शर्मिला इरोम का अनशन,
अभी भी जारी रहने कि खबर आई थी ।
इसलिए नही कि,
सीरिया में फटते बमों ने,
छोटे -छोटे बच्चो की नीद उड़ाई थी ।
इसलिए नही कि,
एक गरीब रिश्तेदार का कैंसर,
लाइलाज होने की खबर आई थी ।
बस इसलिए कि,
नायक और खलनायक के बीच झूलता,
हमारी लम्पट संस्कृति का प्रतिनिधि,
बेचारा बन गया था ।
बस इसलिए कि,
वो कैसे उस जेल में जियेगा,
जो उसके लिए,
केवल ड्रामा का हिस्सा होता ।
बस इसलिए कि,
वो भोलेपन में स्क्रीन की दुनिया से बाहर,
वास्तविक दुनिया के खलनायको में चला गया था ।
बस इसलिए कि,
लाखों वसूल कर सलाह देने वाले वकीलों ने भी,
मुफ्त में बताया था कि वो बच नही सकता ।