शुक्रवार, 22 मार्च 2013

-उदासी -


ड्राईंग रूम बहुत उदास था,
इसलिए नही कि ,
श्रीलंकाई तमिलों की क्षत -विक्षत लाशों ने,
क्रूरता कि पराकास्ठा दिखलाई थी।
इसलिए नही कि,
शर्मिला इरोम का अनशन,
अभी भी जारी रहने कि खबर आई थी ।
इसलिए नही कि,
सीरिया में फटते बमों ने,
छोटे -छोटे बच्चो की नीद उड़ाई थी ।
इसलिए नही कि,
एक गरीब रिश्तेदार का कैंसर,
लाइलाज होने की खबर आई थी ।
बस इसलिए कि,
नायक और खलनायक के बीच झूलता,
हमारी लम्पट संस्कृति का प्रतिनिधि,
बेचारा बन गया था ।
बस इसलिए कि,
वो कैसे उस जेल में जियेगा,
जो उसके लिए,
केवल ड्रामा  का हिस्सा होता ।
बस इसलिए कि,
वो भोलेपन में स्क्रीन की दुनिया से बाहर,
वास्तविक दुनिया के खलनायको में चला गया था ।
बस इसलिए कि,
लाखों वसूल कर सलाह देने वाले वकीलों ने भी,
मुफ्त में बताया था कि वो बच नही सकता ।





सोमवार, 18 मार्च 2013

रैबीज

शीला की जवानी ,
और ,
मुन्नी की बदनामी से ,
पैदा रैबीज ने ,
गावों से महानगरों तक ,
पागल कुत्तों की फौज ,
खड़ी कर दी है ,
लेकिन ,
संसद रैबीज को नही ,
कुत्तों को खोज रही है .

जेन जी के द्वन्द

सुबह उठकर चाय बनाने के लिए फ्रिज से दूध निकालते समय देखा कि दूध पर मलाई की एक मोटी परत जमी है, जिसको निकालकर अलग एक बरतन में रखा जिसमें लगात...